हम सभी अपने भाग्य से अनभिज्ञ हैं। हम नहीं जानते कि हम इस पृथ्वी पर कब तक जीवित रहेंगे। क्योंकि हमारा भविष्य अनिश्चित है, हम अपने परिवार के सदस्यों की रक्षा करने की हमेशा कोशिश करते हैं। यही सोच के हम अपना जीवन बीमा कराते हैं। जीवन बीमा हमे किसी भी अप्रिय घटना, जैसे कि परिवार के कमाऊ सदस्य/सदस्यों की मौत, के लिए एक सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
भारत के लोग अब विभिन्न प्रकार के बीमा जैसे जीवन बीमा / टर्म इंश्योरेंस, मेडिकल बीमा और कई अन्य प्रकार के बीमा की जरूरतों के बारे में अधिक जागरूक हो गए हैं। इन बीमा पॉलिसियों का मूल उद्देश्य हम पर निर्भर सदस्यों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है।
हमें लगता है कि, किसी के अचानक निधन होने पर, इन बीमा पॉलिसियों से परिवार के अन्य सदस्यों को मदद मिलेगी।लेकिन वास्तविकता में, बीमा के कुछ दावों को खारिज कर दिया जाता है। आइए हम यह पता लगाने की कोशिश करें कि बीमा दावों को अस्वीकार क्यों किया जाता है। भविष्य में इन गलतियों से बचने की कोशिश करना आवश्यक है।
दावे को अस्वीकार करने का कारण नंबर 1: गलत विवरण
अक्सर व्यक्ति, नई पॉलिसी लेने के समय, बीमा पालिसी का लंबा फॉर्म खुद नही भरता। वह अपने बीमा एजेंट को फॉर्म भर देने को कहता है। वह सिर्फ फॉर्म पे अपने दस्तखत कर देता है।
एजेंट यह तो सुनिश्चित करता है कि व्यक्ति के नाम और जन्म की तारीख को सही ढंग से लिखा गया है। पर अन्य कॉलम हडबडी में भर देता। इसके परिणामस्वरूप फॉर्म पे अन्य जानकारी (जैसे कि पारिवारिक बीमारियों का इतिहास, व्यक्ति के अस्पताल में भर्ती होने का पिछला इतिहास, आदि) गलत लिखी जाती है। ऐसे मामलों में, पॉलिसी धारक की मृत्यु / दुर्घटना होने पर, गलत जानकारी देने के परिणामस्वरूप, उम्मीदवार के दावे को खारिज कर दिया जाता है।
दावे को अस्वीकार करने का कारण नंबर 2: गलत नौकरी का विवरण
यदि किसी व्यक्ति की जॉब प्रोफाइल ऐसी है, जिसमें कुछ खतरे हैं, तो उसे अपने काम से जुड़े खतरे / खतरे को कवर करने के लिए अधिक प्रीमियम देना पड़ता है। लेकिन कई मामलों में, प्रीमियम के बोझ को कम करने के लिए, ऐसा व्यक्ति बीमा फॉर्म भरते समय स्पष्ट रूप से इसका संकेत नहीं देता है। सही जानकारी ना देना, नामांकित व्यक्ति द्वारा किये गए दावे की अस्वीकृति का कारण हो सकता है यदि व्यक्ति काम से जुड़े खतरे के कारण मर जाता है।
अस्वीकृति के लिए कारण नंबर 3: पहले से मौजूद बीमारी को छिपाना
स्वास्थ्य संबंधी बीमा पॉलिसी के मामले में, पहले से मौजूद बीमारी की जानकारी देना पॉलिसी धारक के लिए बहुत आवश्यक है। यदि पॉलिसी धारक ऐसा करने में विफल रहता है और यदि मृत्यु पहले से मौजूद बीमारी के कारण होती है, तो पॉलिसी धारक के नॉमिनी (नामांकित किया गया व्यक्ति) के दावे के खारिज होने की शक्यता बहुत ज्यादा है।
अस्वीकृति के लिए कारण संख्या 4: दावा करने में देरी
कई मामलों में यह देखा किया गया है कि नामांकित व्यक्ति कई दिनों के बीतने के बाद बीमा पालिसी की रकम का दावा करता है। यह याद रखना चाहिए कि दावा एक निर्धारित अवधि के भीतर दर्ज किया जाना चाहिए। पॉलिसी धारक के निधन पर, नॉमिनी को मृत्यु प्रमाण पत्र जल्द से जल्द प्राप्त कर लेना चाहिए और फिर जल्द बीमा राशि का दावा भी कर देना चाहिए (अधिमानतः 21-30 दिनों के भीतर)।
दावा अस्वीकृति के लिए कारण संख्या 5: बीमा पॉलिसी का लैप्स (व्यपगत) हो जाना।
बीमा क्षेत्र से जुड़े लोग बताते हैं कि यह प्रमुख कारण है एक दावे की अस्वीकृति का। कई पॉलिसी धारक समय पर प्रीमियम का भुगतान करना भूल जाते हैं और इसलिए उनकी बीमा पॉलिसी लैप्स (व्यपगत) हो जाती है। नामांकित व्यक्ति को आमतौर पर प्रीमियम का भुगतान न करने से पॉलिसी लैप्स हो जाने की जानकारी नहीं होती। ऐसी व्यपगत बीमा पालिसी के धारक की मृत्यु हो जाने पर, नामांकित व्यक्ति द्वारा किया गया दावा खारिज हो जाता है।
इसलिए भविष्य के पॉलिसी धारकों को बीमा आवेदन फॉर्म को सही तरीके से भरना चाहिए। उन्हें इसे स्वयं करना चाहिए, पहले से मौजूद बीमारियों को छुपाना नहीं चाहिए और नियमित रूप से प्रीमियम का भुगतान करना चाहिए। पॉलिसी धारक की मृत्यु होने पर, नॉमिनी को समय-सीमा के भीतर दावा प्रस्तुत कर देना चाहिए। इस तरह के सरल कदम लेने से आप बीमा राशि के दावे की अस्वीकृति होने से अपने आप को बचा सकते हैं।
भारत के लोग अब विभिन्न प्रकार के बीमा जैसे जीवन बीमा / टर्म इंश्योरेंस, मेडिकल बीमा और कई अन्य प्रकार के बीमा की जरूरतों के बारे में अधिक जागरूक हो गए हैं। इन बीमा पॉलिसियों का मूल उद्देश्य हम पर निर्भर सदस्यों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है।
हमें लगता है कि, किसी के अचानक निधन होने पर, इन बीमा पॉलिसियों से परिवार के अन्य सदस्यों को मदद मिलेगी।लेकिन वास्तविकता में, बीमा के कुछ दावों को खारिज कर दिया जाता है। आइए हम यह पता लगाने की कोशिश करें कि बीमा दावों को अस्वीकार क्यों किया जाता है। भविष्य में इन गलतियों से बचने की कोशिश करना आवश्यक है।
दावे को अस्वीकार करने का कारण नंबर 1: गलत विवरण
अक्सर व्यक्ति, नई पॉलिसी लेने के समय, बीमा पालिसी का लंबा फॉर्म खुद नही भरता। वह अपने बीमा एजेंट को फॉर्म भर देने को कहता है। वह सिर्फ फॉर्म पे अपने दस्तखत कर देता है।
एजेंट यह तो सुनिश्चित करता है कि व्यक्ति के नाम और जन्म की तारीख को सही ढंग से लिखा गया है। पर अन्य कॉलम हडबडी में भर देता। इसके परिणामस्वरूप फॉर्म पे अन्य जानकारी (जैसे कि पारिवारिक बीमारियों का इतिहास, व्यक्ति के अस्पताल में भर्ती होने का पिछला इतिहास, आदि) गलत लिखी जाती है। ऐसे मामलों में, पॉलिसी धारक की मृत्यु / दुर्घटना होने पर, गलत जानकारी देने के परिणामस्वरूप, उम्मीदवार के दावे को खारिज कर दिया जाता है।
दावे को अस्वीकार करने का कारण नंबर 2: गलत नौकरी का विवरण
यदि किसी व्यक्ति की जॉब प्रोफाइल ऐसी है, जिसमें कुछ खतरे हैं, तो उसे अपने काम से जुड़े खतरे / खतरे को कवर करने के लिए अधिक प्रीमियम देना पड़ता है। लेकिन कई मामलों में, प्रीमियम के बोझ को कम करने के लिए, ऐसा व्यक्ति बीमा फॉर्म भरते समय स्पष्ट रूप से इसका संकेत नहीं देता है। सही जानकारी ना देना, नामांकित व्यक्ति द्वारा किये गए दावे की अस्वीकृति का कारण हो सकता है यदि व्यक्ति काम से जुड़े खतरे के कारण मर जाता है।
अस्वीकृति के लिए कारण नंबर 3: पहले से मौजूद बीमारी को छिपाना
स्वास्थ्य संबंधी बीमा पॉलिसी के मामले में, पहले से मौजूद बीमारी की जानकारी देना पॉलिसी धारक के लिए बहुत आवश्यक है। यदि पॉलिसी धारक ऐसा करने में विफल रहता है और यदि मृत्यु पहले से मौजूद बीमारी के कारण होती है, तो पॉलिसी धारक के नॉमिनी (नामांकित किया गया व्यक्ति) के दावे के खारिज होने की शक्यता बहुत ज्यादा है।
अस्वीकृति के लिए कारण संख्या 4: दावा करने में देरी
कई मामलों में यह देखा किया गया है कि नामांकित व्यक्ति कई दिनों के बीतने के बाद बीमा पालिसी की रकम का दावा करता है। यह याद रखना चाहिए कि दावा एक निर्धारित अवधि के भीतर दर्ज किया जाना चाहिए। पॉलिसी धारक के निधन पर, नॉमिनी को मृत्यु प्रमाण पत्र जल्द से जल्द प्राप्त कर लेना चाहिए और फिर जल्द बीमा राशि का दावा भी कर देना चाहिए (अधिमानतः 21-30 दिनों के भीतर)।
दावा अस्वीकृति के लिए कारण संख्या 5: बीमा पॉलिसी का लैप्स (व्यपगत) हो जाना।
बीमा क्षेत्र से जुड़े लोग बताते हैं कि यह प्रमुख कारण है एक दावे की अस्वीकृति का। कई पॉलिसी धारक समय पर प्रीमियम का भुगतान करना भूल जाते हैं और इसलिए उनकी बीमा पॉलिसी लैप्स (व्यपगत) हो जाती है। नामांकित व्यक्ति को आमतौर पर प्रीमियम का भुगतान न करने से पॉलिसी लैप्स हो जाने की जानकारी नहीं होती। ऐसी व्यपगत बीमा पालिसी के धारक की मृत्यु हो जाने पर, नामांकित व्यक्ति द्वारा किया गया दावा खारिज हो जाता है।
इसलिए भविष्य के पॉलिसी धारकों को बीमा आवेदन फॉर्म को सही तरीके से भरना चाहिए। उन्हें इसे स्वयं करना चाहिए, पहले से मौजूद बीमारियों को छुपाना नहीं चाहिए और नियमित रूप से प्रीमियम का भुगतान करना चाहिए। पॉलिसी धारक की मृत्यु होने पर, नॉमिनी को समय-सीमा के भीतर दावा प्रस्तुत कर देना चाहिए। इस तरह के सरल कदम लेने से आप बीमा राशि के दावे की अस्वीकृति होने से अपने आप को बचा सकते हैं।
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